द्वितीय अखिल भारतीय आरोग्य सम्मेलन 2026 में स्वस्थ भारत के निर्माण पर राष्ट्रीय मंथन

 

नई दिल्ली | आरोग्य सृजन न्यास के तत्वावधान में आयोजित द्वितीय अखिल भारतीय आरोग्य सम्मेलन–2026 का भव्य आयोजन नई दिल्ली स्थित इंडिया इंटरनेशनल सेंटर में सम्पन्न हुआ। सम्मेलन में देशभर से आए चिकित्सकों, योगाचार्यों, आयुर्वेदाचार्यों, शिक्षाविदों, समाजसेवियों और पत्रकारों ने स्वास्थ्य, योग, भारतीय जीवनशैली और जनकल्याण से जुड़े विभिन्न विषयों पर गहन विचार-विमर्श किया।

सम्मेलन की विशिष्ट अतिथि डॉ. शशि यादव ने अपने संबोधन में कहा कि उत्तम स्वास्थ्य केवल शरीर के स्वस्थ रहने तक सीमित नहीं है, बल्कि तन, मन और आत्मा के संतुलन का परिणाम है। उन्होंने कहा कि आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में तनाव, असंतुलित खान-पान और अनियमित दिनचर्या कई बीमारियों की वजह बन रही है।

उन्होंने कहा कि यदि व्यक्ति अपने जीवन में संतुलित आहार, नियमित योग एवं ध्यान, सकारात्मक सोच, पर्याप्त विश्राम और सेवा-भाव को अपनाए तो वह शारीरिक, मानसिक और आध्यात्मिक रूप से स्वस्थ रह सकता है। उनके अनुसार आत्मिक शांति ही वास्तविक स्वास्थ्य का आधार है।

डॉ. शशि यादव ने महिलाओं, युवाओं और समाज के सभी वर्गों से स्वास्थ्य के प्रति जागरूक रहने का आह्वान करते हुए कहा कि स्वास्थ्य केवल व्यक्तिगत विषय नहीं, बल्कि सामाजिक जिम्मेदारी भी है। उनके विचारों ने उपस्थित लोगों को स्वस्थ और संतुलित जीवनशैली अपनाने के लिए प्रेरित किया।

इस अवसर पर स्वास्थ्य जागरूकता, सामाजिक सेवा और जनकल्याण के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान के लिए डॉ. शशि यादव को प्रतिष्ठित ‘आरोग्य सेवा सम्मान’ से सम्मानित किया गया। सम्मान प्राप्त करते हुए उन्होंने इसे सभी स्वास्थ्यकर्मियों, चिकित्सकों और जनसेवकों को समर्पित किया।

विशिष्ट अतिथि डॉ. भूप सिंह यादव, सदस्य, हिंदी सलाहकार समिति, रक्षा मंत्रालय, भारत सरकार ने कहा कि “स्वस्थ भारत ही सशक्त भारत की आधारशिला है।” उन्होंने नागरिकों से नियमित व्यायाम, योग, संतुलित आहार और नशामुक्त जीवनशैली अपनाने का आह्वान किया।

उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य संबंधी जागरूकता को देश के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने में भारतीय भाषाओं, विशेषकर हिंदी की महत्वपूर्ण भूमिका है। उन्होंने सभी से स्वयं स्वस्थ रहने और समाज को भी स्वास्थ्य के प्रति जागरूक बनाने का संदेश दिया।

सम्मेलन के विशिष्ट अतिथि अनिल कुमार, अपर न्यायाधीश, प्रयागराज ने भारतीय संस्कृति और स्वास्थ्य के गहरे संबंध पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि भारत की प्राचीन संस्कृति सदैव योग, आयुर्वेद, स्वच्छता, संयम और प्रकृति संरक्षण का संदेश देती रही है।

उन्होंने कहा कि यदि समाज अपनी सांस्कृतिक परंपराओं, नैतिक मूल्यों और स्वस्थ जीवनशैली को दोबारा अपनाए तो अनेक शारीरिक और मानसिक बीमारियों से बचा जा सकता है। उन्होंने युवाओं से भारतीय संस्कृति और स्वास्थ्यपरक जीवनशैली अपनाने की अपील की।

सम्मेलन में मौजूद सभी चिकित्सकों, योगाचार्यों, आयुर्वेदाचार्यों, शिक्षाविदों, समाजसेवियों और पत्रकारों ने स्वास्थ्य जागरूकता, योग, आयुर्वेद और प्राकृतिक चिकित्सा को जन-जन तक पहुंचाने का सामूहिक संकल्प लिया।

कार्यक्रम के अंत में उमेश प्रसाद सिंह ने धन्यवाद ज्ञापन देते हुए सभी अतिथियों, प्रतिभागियों और आयोजन में सहयोग देने वाले लोगों का आभार व्यक्त किया। कार्यक्रम का समापन राष्ट्रगान और “स्वस्थ भारत, समृद्ध भारत” के सामूहिक संकल्प के साथ हुआ।

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