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जांच के नाम पर किसान नेताओं पर शिकंजा? बलराज भाटी ने कहा—दबाव नहीं, निष्पक्ष कार्रवाई चाहिए

ग्रेटर नोएडा। भारतीय किसान यूनियन (बलराज) के राष्ट्रीय अध्यक्ष बलराज भाटी ने किसान नेताओं के खिलाफ जांच के नाम पर कथित उत्पीड़न और दबाव बनाए जाने का आरोप लगाया है। उन्होंने सरकार से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने तथा किसानों और किसान नेताओं के अधिकारों का सम्मान सुनिश्चित करने की मांग की।

ग्रेटर नोएडा के अल्फा फर्स्ट स्थित सी-ब्लॉक जर्नलिस्ट प्रेस क्लब में आयोजित प्रेस वार्ता में बलराज भाटी ने कहा कि प्रदेश के विभिन्न हिस्सों से किसान नेताओं के घर पुलिस पहुंचने और परिवार के सदस्यों की जानकारी के साथ बैंक खातों, पैन कार्ड, आधार कार्ड सहित अन्य व्यक्तिगत विवरण जुटाए जाने की शिकायतें सामने आ रही हैं। उन्होंने कहा कि यदि किसी व्यक्ति के खिलाफ कोई वास्तविक शिकायत या आपराधिक मामला है तो कानून के अनुसार जांच की जानी चाहिए, लेकिन जांच की आड़ में दबाव बनाना उचित नहीं है।

बलराज भाटी ने कहा कि किसान संगठन किसानों, मजदूरों और आम लोगों की समस्याओं को शासन-प्रशासन तक पहुंचाने का काम करते हैं। उन्होंने कहा कि भ्रष्टाचार, अधिकारियों की कथित मनमानी अथवा किसानों से जुड़ी समस्याओं को लेकर लोकतांत्रिक तरीके से आवाज उठाना नागरिकों का अधिकार है।

उन्होंने कहा कि यदि किसान नेताओं की जांच कराई जा रही है तो किसानों की शिकायतों और अधिकारियों-कर्मचारियों के खिलाफ लगाए जा रहे भ्रष्टाचार, रिश्वतखोरी, मनमानी और उत्पीड़न के आरोपों की भी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। उन्होंने मेरठ में किसान नेताओं के साथ कथित दुर्व्यवहार के मामले का उल्लेख करते हुए संबंधित अधिकारियों की भूमिका की निष्पक्ष जांच और दोषी पाए जाने पर नियमानुसार कार्रवाई की मांग की।

मेरठ प्रकरण का तथ्य: अगस्त 2026 में मेरठ के किसान नेताओं दिग्विजय भाटी और मोहित जाटव ने तत्कालीन SSP अविनाश पांडेय समेत पुलिसकर्मियों पर हिरासत के दौरान मारपीट और कथित थर्ड-डिग्री टॉर्चर के आरोप लगाए थे। पुलिस की ओर से चोटों के संबंध में अलग दावा किया गया था। मामले के बीच अविनाश पांडेय को मेरठ SSP पद से हटाकर पुलिस महानिदेशक मुख्यालय से संबद्ध किया गया और बीबीजीटीएस मूर्ति को नया मेरठ SSP नियुक्त किया गया। 

प्रेस वार्ता में संगठन के पदाधिकारी और कार्यकर्ता मौजूद रहे।

बलराज भाटी ने कहा कि किसान नेताओं और कार्यकर्ताओं के खिलाफ यदि उत्पीड़न की शिकायतें जारी रहीं तथा किसानों की समस्याओं का समाधान नहीं हुआ तो भारतीय किसान यूनियन (बलराज) प्रदेश और राष्ट्रीय स्तर पर लोकतांत्रिक आंदोलन की रणनीति तैयार करेगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि संगठन संविधान और कानून के दायरे में रहकर किसानों के अधिकारों की लड़ाई जारी रखेगा।

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