ग्रेटर नोएडा – अतुल कृष्ण भारद्वाज जी के अमृत मयी वाणी से श्री राम कथा का आयोजन ,आठवां दिन I

भरत जी व केवट से लें त्याग व भक्ति की प्रेरणा
कथा व्यास परमपूज्य श्री अतुल कृष्ण भारद्वाज जी “महाराज”
ग्रेटर नोएडा -श्रीराम कथा में कथा व्यास पूज्य अतुल कृष्ण भारद्वाज जी ने श्रोताओं से कहा कि भरत व केवट से त्याग एवं भक्ति की प्रेरणा लेनी चाहिए। क्योंकि राम और भरत ने संपत्ति का बंटवारा नहीं किया, बल्कि विपत्ति का बंटवारा किया। वहीं केवट ने समर्पित भाव से भगवान राम के चरण धोए थे। साथ ही उन्होंने कहा कि संसार की कोई भी माता अपने पुत्रों को कष्ट नहीं देना चाहती।
व्यास जी ने वनगमन के समय श्रीराम की भेंट उनके प्रिय सखा निषादराज गुह से कराई। तत्पश्चात गंगा नदी पार करने के लिए भगवान की भेंट केवट से हुई। भगवान को साक्षात अपने सामने पाकर केवट ने अपनी विनम्र प्रार्थना रखी। उसने कहा कि जब तक आप अपने चरण नहीं धुलवाएंगे, तब तक मैं आपको नदी पार नहीं कराऊंगा। अंततः भगवान को विवश होकर केवट से अपने चरण धुलवाने पड़े। भगवान के चरण स्पर्श करने का अवसर पाकर केवट धन्य हो गया, जिससे उसके साथ-साथ उसकी सात पीढ़ियाँ भी तर गईं।
उन्होंने कहा कि यदि आप सभी सच्चे मन से भगवान की भक्ति करेंगे, तो भगवान के दर्शन अवश्य प्राप्त होंगे और आप भी भवसागर से पार हो जाएंगे। श्री भारद्वाज जी ने राम-भरत मिलन प्रसंग का वर्णन करते हुए कहा कि प्रभु राम ने भरत को रघुवंश का हंस कहा है। भरत प्रेमरूपी अमृत के सागर हैं। भरत चित्रकूट से श्रीराम की चरण पादुका लेकर आए और उन्हें सिंहासन पर स्थापित कर, भगवान के अयोध्या लौटने से पूर्व ही रामराज्य की स्थापना कर दी।
उन्होंने श्रोताओं से कहा कि जब हम अपने जीवन में दूसरों के योगदान पर विचार करते हैं और भगवान राम के जीवन को देखते हैं, तो अनुभव होता है कि हमारे जीवन में हमारा अपना योगदान बहुत कम है। अतः हमें अपनी योग्यता बढ़ानी चाहिए।
देश के पूर्व राष्ट्रपति ए. पी. जे. अब्दुल कलाम ने गीता का सार समझकर अपनी योग्यता का विस्तार किया और अपना संपूर्ण जीवन राष्ट्र की उन्नति के लिए समर्पित कर दिया। स्वामी विवेकानंद ने अमेरिका में वेदांत का प्रचार कर भारत को आध्यात्मिक रूप से विश्व में अग्रणी बनाया।
जो व्यक्ति सच्चा ज्ञानी होता है, वही समाज में ज्ञान का प्रकाश फैलाता है। उन्होंने कहा कि कनिष्ठ भी अपने गुणों के आधार पर श्रेष्ठ बन सकता है, क्योंकि श्रेष्ठता सदैव गुणों पर निर्भर करती है। विषम परिस्थितियों में कष्टों को सहन कर उनसे सीखने का प्रयास करना चाहिए। यही श्रेष्ठता प्राप्त करने का प्रथम सोपान है।
अतः हमें भरत जी से यह प्रेरणा लेनी चाहिए कि त्याग और भक्ति सदैव सर्वोत्तम गुण होते

हनुमान जी की तरह भगवान के नाम का सुमिरन और कीर्तन जीवन का हिस्सा बने इन सारी बातों को महाराज जी ने बड़ी सुगमता से कथा श्रोताओं के सामने रख सबको धन्य किया।

आज कथा मुख्य यजमान श्री हरवीर मावी सह मुख्य यजमान शेर सिंह भाटी, धीरज शर्मा रहे हैं।

आज के दैनिक यजमान विजय प्रधान जी रहे हैं।

इस राम कथा में आज वरिष्ठ प्रचारक ईश्वर दयाल जी, स्वामी सुशील जी महाराज, प्रांत प्रचारक वेदपाल जी, जिला प्रचारक नेम पाल जी, राजकुमार जी, अध्यक्ष आनंद भाटी, पंडित प्रदीप शर्मा, कुलदीप शर्मा, दिनेश गुप्ता, पवन नागर, ममता तिवारी, मनीष डावर, अतुल आनंद, फिरे प्रधान, सत्यवीर मुखिया, महेश शर्मा बदौली, उमेश गौतम, रोशनी सिंह, वीरपाल मावी, तेज कुमार भाटी, सुंदर भाटी, भगवत भाटी, ज्योति सिंह, अश्विनी शुक्ला, राकेश बैसोया, रश्मि अरोड़ा, गीता सागर, यशपाल नागर, चैनपाल प्रधान अजय कसाना पवन भाटी राजेश नंबर दार राकेश नंबरदार उपस्थित रहे हैं।

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